meri baat

लोकतंत्र किसके लिए ? आज सबसे बड़ा सवाल लोगों की ज़हन में है. आज के लोकतंत्र में लोक यानी जनता फ्रेम से बाहर है.
लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए,जनता के द्वारा ..................... दिल पर हाथ रखिये और बोलिए कहाँ है जनता.
चौथा खम्भा भी जनता के मुद्दों के बजाये IPL को ज्यादा तबज्जो देता है. थरूर हो, महिला विधेयक हो या जनहित
से अलग कोई मुद्दा विपक्ष अपनी बात मनवा ही लेती है पर महंगाई के मुद्दे पर चिल्लाकर चुप हो जाती , उसे पता है
जनता के लिए कुछ करोगे कल और ज्यादा अपेक्षा किया जायेगाइसलिए बेमतलब के मुद्दे उठाओ. नहीं लगता की लोगों में आक्रोश है ?
पर अभी फूट नहीं रहा लेकिन कई बड़ी समस्या khadi है जिसके पीछे तंत्र खासकर लोकतंत्र की विफलता है.
किसी न किसी को तो जगाना ही पड़ेगा चाहे जनता जागे, नेता जागे या अवाम. जनता जागेगी तो संभावना है कहर टूटे.

भाई बचाइए लोकतंत्र को ! किसी तरह .

लोकतंत्र का मतलब लोकतंत्र के पीछे की अवधारण को बचाइए.

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